राज्यसभा को लेकर शशि थरूर की चेतावनी क्या देश में असंतुलन बढ़ाएगी?

महिला आरक्षण और परिसीमन पर शशि थरूर की चिंता: संसदीय असंतुलन की जताई आशंका
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण अधिनियम और परिसीमन विधेयक पर जारी बहस के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के प्रस्तावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन की जटिल प्रक्रिया से जोड़ने की आलोचना करते हुए इसे देश की महिलाओं की आकांक्षाओं को बंधक बनाने जैसा करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि लोकसभा में सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 करने का निर्णय संसद के कामकाज को कठिन बना देगा और राज्यसभा के साथ इसका सीधा असंतुलन पैदा करेगा।
दोनों सदनों के बीच संतुलन का मुद्दा
थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन बिल की जल्दबाजी को लेकर पार्टी को आपत्ति है। उनका कहना है कि राज्यसभा में सीटों के विस्तार पर कोई चर्चा न होना दोनों सदनों की संवैधानिक भूमिका को प्रभावित करेगा। साथ ही, उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों जैसे केरल और तमिलनाडु के हितों की अनदेखी होने की आशंका जाहिर की। थरूर ने चेतावनी दी कि यदि इस विषय पर बिना गहन मंथन और सर्वसम्मति के आगे बढ़ा गया, तो यह राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।
कांग्रेस सांसद ने इस पूरी प्रक्रिया की तुलना नोटबंदी से करते हुए सरकार से आग्रह किया कि परिसीमन बिल को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 850 सांसदों के बड़े सदन में कार्यवाही का संचालन और सभी सदस्यों को समान अवसर देना प्रशासनिक रूप से एक बड़ी चुनौती साबित होगा। थरूर के अनुसार, यह निर्णय केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत विवादास्पद है।
एक नजर में
- शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
- लोकसभा सीटों को 850 करने से राज्यसभा के साथ संतुलन बिगड़ने का तर्क दिया गया है।
- थरूर ने इसे ‘राजनीतिक नोटबंदी’ बताते हुए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की है।
- दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा और देशव्यापी सर्वसम्मति पर गंभीर मंथन करने पर बल दिया है।
