परिसीमन विधेयक संविधान पर एक सीधा हमला!

संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण पर घमासान, नए विधेयकों पर छिड़ी बहस
लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि संशोधन विधेयक पेश किए गए। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाना और लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 तक करना है। सरकार का तर्क है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना अनिवार्य है, जिसके लिए सीटों का पुनर्गठन आवश्यक है।
साउथ बनाम नॉर्थ की राजनीति
दूसरी ओर, विपक्ष ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने इस प्रक्रिया को संविधान पर सीधा हमला करार देते हुए राज्यों के बीच असंतुलन की चेतावनी दी है। विपक्ष का मानना है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा। वहीं, बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि इससे किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और महिला आरक्षण को लेकर व्यापक सहमति जरूरी है।
प्रभाव और भविष्य की राह
यदि यह विधेयक पारित होते हैं, तो भारत के चुनावी भूगोल में बड़ा बदलाव आएगा। परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना को बनाया गया है, जिससे भविष्य में राज्यों की राजनीतिक शक्ति और प्रतिनिधित्व के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। इन विधेयकों का सीधा प्रभाव यह होगा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी तो बढ़ेगी, लेकिन लोकसभा सीटों के पुनर्गठन को लेकर केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच एक नया राजनीतिक गतिरोध उत्पन्न होने की पूरी संभावना है।
एक नजर में
- लोकसभा में संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े तीन नए विधेयक पेश किए गए।
- महिला आरक्षण (33%) लागू करने हेतु लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव है।
- विपक्ष ने परिसीमन को दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए हानिकारक बताते हुए विरोध जताया है।
- 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने की तैयारी है।
