जाति आधारित जनगणना पर बड़ा ऐलान, अमित शाह ने संसद में दूर किया हर कन्फ्यूजन!

महिला आरक्षण और परिसीमन: अमित शाह ने स्पष्ट की सरकार की रणनीति
लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया कि महिला आरक्षण का क्रियान्वयन 2026 के बाद होने वाली जनगणना और उसके बाद के परिसीमन पर निर्भर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन को इस विधेयक का आधार बनाना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है, ताकि ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को सुनिश्चित किया जा सके। शाह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है: 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण को अनिवार्य रूप से लागू करना।
इतिहास का हवाला देकर विपक्ष पर साधा निशाना
गृह मंत्री ने 1971 और 1976 के परिसीमन संशोधनों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान ही परिसीमन की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई थी, जिसके कारण 1976 से आज तक सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है। शाह के अनुसार, उस समय 56.79 करोड़ की आबादी के लिए तय किए गए सांसदों की संख्या आज 140 करोड़ की जनसंख्या के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने विपक्ष पर देश को परिसीमन के लाभ से वंचित रखने और जनसांख्यिकीय बदलावों को अनदेखा करने का आरोप लगाया।
प्रभाव और लक्ष्य
इस विधेयक का उद्देश्य केवल महिला सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि संसदीय प्रतिनिधित्व को मौजूदा जनसंख्या के अनुपात में अधिक तार्किक और सटीक बनाना है। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से भारत के चुनावी ढांचे में व्यापक बदलाव की संभावना है, जिससे न केवल नारी शक्ति को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, बल्कि बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों का भी पुनर्गठन होगा।
एक नजर में
- ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन अनिवार्य है।
- सरकार का दावा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण प्रभावी रूप से लागू होगा।
- गृह मंत्री ने विपक्षी दल कांग्रेस पर परिसीमन प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।
- 140 करोड़ की आबादी के अनुरूप सीटों का पुनर्निर्धारण कर ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य है।
