रूसी तेल पर अडिग भारत: वित्त मंत्री का बड़ा बयान
नई दिल्ली। अमेरिकी दबाव और बढ़े हुए टैरिफ के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति स्वतंत्र और हित आधारित रहेगी। शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखेगा और यह फैसला पूरी तरह देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर किया गया है।
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जिसमें आधा हिस्सा रूसी तेल की खरीद पर दंडात्मक टैक्स के तौर पर जोड़ा गया है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि भारत की खरीद से रूस को आर्थिक मदद मिल रही है और यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच रहा है। हालांकि, भारत ने यह दावा खारिज करते हुए कहा है कि रूसी तेल खरीदना कानूनी है और इस पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल ने न केवल भारत की ऊर्जा लागत घटाई है बल्कि वैश्विक बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को रूसी तेल पर 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिल रही है, जबकि अमेरिकी तेल अपेक्षाकृत महंगा साबित हो रहा है। यही वजह है कि सरकार अमेरिकी दबाव के बावजूद इस खरीद को जारी रखने पर अडिग है।
