बिहार में मंत्री बनने की राह में कौन है सबसे बड़ी रुकावट?

बिहार मंत्रिमंडल विस्तार: चुनाव नतीजों के इंतजार में टली प्रक्रिया
बिहार में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टाल दिया गया है। वर्तमान में मुख्यमंत्री के साथ केवल दो उपमुख्यमंत्री कार्यभार संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार में देरी का मुख्य कारण पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनावी तैयारियों में व्यस्त हैं, जिसके चलते नए मंत्रियों के नामों और विभागों के बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। अब इस प्रक्रिया के चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद शुरू होने की उम्मीद है।
बदलते राजनीतिक समीकरण और सत्ता का नया स्वरूप
राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि इस बार सत्ता का संतुलन पूर्व की तुलना में काफी अलग होगा। बीजेपी और जेडीयू के बीच बनी नई सहमति के अनुसार, अब बीजेपी ‘बड़े भाई’ की भूमिका में नजर आएगी। संभावित फॉर्मूले के तहत बीजेपी के खाते में 17 और जेडीयू के पास 15 मंत्रिपद रहने की उम्मीद है। वहीं, सहयोगी दलों जैसे एलजेपी (रामविलास), आरएलपी और ‘हम’ को भी मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की योजना है। इस बदलाव से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे में बड़े फेरबदल के आसार हैं।
एक नजर में
- मंत्रिमंडल विस्तार को पांच राज्यों के चुनावी नतीजों (4 मई) तक के लिए स्थगित किया गया है।
- बीजेपी और जेडीयू के बीच 17:15 के मंत्री अनुपात पर सहमति के संकेत हैं।
- राज्य में अब बीजेपी मुख्य भूमिका निभाएगी, जबकि सहयोगियों को भी कैबिनेट में स्थान मिलेगा।
- फिलहाल मुख्यमंत्री ने अपने पास बीजेपी कोटे के कई महत्वपूर्ण विभाग रखे हुए हैं।
