उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग से बदल गया नतीजा

उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से विपक्षी प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी को हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले जबकि रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। हालांकि विपक्ष का दावा था कि उसके सभी 315 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया, लेकिन नतीजे में यह आंकड़ा 15 वोट कम साबित हुआ। इससे साफ है कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चुनाव के कुल समीकरण में 39 सांसद ऐसे थे जो न तो एनडीए के साथ थे और न ही इंडिया गठबंधन के साथ। इनमें से 11 सांसद वाईएसआरसीपी के थे, जिन्होंने एनडीए को समर्थन दिया। वहीं बीजेडी, बीआरएस और अकाली दल के कुछ सांसदों ने किसी भी पक्ष में वोट नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक, कुल 15 वोट अवैध घोषित हुए, जिनमें से 10 एनडीए और 5 विपक्षी खेमे से थे। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 10 वोट क्रॉस वोटिंग की वजह से नतीजों पर असर डाल गए।

जीत के बाद सीपी राधाकृष्णन ने इसे “राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत” बताया और कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह चुनाव निर्णायक साबित होगा। वहीं विपक्षी खेमे में यह चर्चा जारी है कि 100% उपस्थिति के बावजूद वोटों का संतुलन बिगड़ा कैसे। यह हार विपक्ष के लिए पिछले 11 सालों में सबसे कम अंतर वाली हार रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।