आशा भोसले: बरगद की छांव तले खिला पीपल
92 साल की उम्र पूरी कर चुकीं आशा भोसले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुर और जिंदादिली उम्र की कैद में नहीं बंधते। हाल ही में उमराव जान की री-रिलीज़ पर वह मंच पर आईं, जहां उनके साथ रेखा और निर्देशक मुजफ्फर अली मौजूद थे। उम्रदराज दिखने के बावजूद जब उन्होंने “ये क्या जगह है दोस्तों” गुनगुनाया, तो सुरों की वही खनक सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
लता मंगेशकर जैसी विराट हस्ती की छाया में रहते हुए भी आशा भोसले ने अपनी अलग राह बनाई। जहां लता की आवाज शास्त्रीयता की भव्यता लिए होती थी, वहीं आशा की गायकी में पॉप और नयापन झलकता रहा। संगीतकार ओपी नय्यर और बाद में आरडी बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत हिट गाने दिए। यही वजह है कि वह धीरे-धीरे लता की छाया से बाहर निकलकर अपनी पहचान गढ़ने में सफल रहीं।
आशा ने खुद स्वीकार किया था कि “बरगद की छांव में कोई पेड़ नहीं पनपता।” अपनी शाखाएं फैलाने के लिए उन्हें अलग सुर और अंदाज तलाशना पड़ा। यही कारण है कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप, ग़ज़ल, कव्वाली और लोकगीत तक हर शैली में खुद को आज़माया। सात दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने मीना कुमारी से लेकर उर्मिला मातोंडकर तक कई पीढ़ियों की हीरोइनों को आवाज दी और आज भी उनकी पहचान उतनी ही चमकदार है।
