अमेरिका पर भारत का कड़ा रुख: फॉरेक्स रिज़र्व पर कोई हक नहीं
भारत ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर किसी भी बाहरी ताकत का कोई अधिकार नहीं है। व्हाइट हाउस स्टेट एडवाइजरी पीटर नवारो ने हाल ही में दावा किया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक को अपने पास मौजूद अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल वाशिंगटन की मंजूरी से करना चाहिए। खासकर रूस से तेल खरीद के मामले में अमेरिका ने भारत को चेतावनी देने की कोशिश की।
इस पर भारत ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने अमेरिका की टिप्पणियों को “दादागिरी” बताते हुए कहा कि यह भारत की संप्रभुता में दखल है। उन्होंने याद दिलाया कि 1960-70 के दशक में अमेरिका ने जर्मनी के साथ भी ऐसी ही शर्तें लगानी चाही थीं, जिन्हें उस समय कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बयानों को “झूठे तथ्यों” पर आधारित बताया और जोर दिया कि चीन की रूस पर तेल निर्भरता कहीं अधिक है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति का हिस्सा है। भारत लगातार यह स्पष्ट कर चुका है कि ऊर्जा सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए वह अपने फॉरेक्स रिज़र्व का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित के अनुसार करेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया मास्को यात्रा भी इस संदेश का हिस्सा मानी जा रही है कि भारत किसी दबाव में आने को तैयार नहीं।
