संसद में प्रियंका गांधी के 5 तीखे सवाल जिन्होंने मचाई खलबली!

प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला, महिला आरक्षण और परिसीमन को बताया ‘राजनीतिक कुटिलता’
महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी घमासान
कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन प्रस्ताव को लेकर मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण का उपयोग केवल अपनी सत्ता बचाने के एक बहाने के रूप में कर रही है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन की आड़ में सरकार देश के संघीय ढांचे और लोकतंत्र को कमजोर करने की योजना बना रही है। उनके अनुसार, परिसीमन के प्रावधानों के माध्यम से ओबीसी वर्ग के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल
बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरी योजना राजनीतिक लाभ के लिए रची गई है। उन्होंने सरकार से पांच प्रमुख सवाल किए हैं, जिनमें जातिगत जनगणना से भागने, वर्तमान 543 सीटों पर तत्काल महिला आरक्षण लागू न करने और ओबीसी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित न करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रियंका ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सम्मान के प्रति गंभीर है, तो उन्हें परिसीमन का इंतजार करने के बजाय तत्काल मौजूदा संख्याबल के आधार पर आरक्षण का लाभ देना चाहिए।
इस घटनाक्रम का सीधा असर आने वाले समय में चुनावी विमर्श पर पड़ना तय है। विपक्षी दल इसे ओबीसी की भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के लिए यह परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत सहित विभिन्न राज्यों में सीटों के समीकरण बदलने की एक रणनीतिक पहल है।
एक नजर में
- प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक को सत्ता बचाने का जरिया बताया।
- परिसीमन को देश के संघीय ढांचे और लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया।
- सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने और ओबीसी वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया।
- मांग की कि परिसीमन का इंतज़ार किए बिना वर्तमान लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू हो।
