संसद में गिरा महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक, क्या विपक्ष की ‘लक्ष्मण रेखा’ में उलझ गई सरकार?

संसद में गिरा महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक, क्या विपक्ष की ‘लक्ष्मण रेखा’ में उलझ गई सरकार?

लोकसभा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाक्रम के तहत 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में यह पहला अवसर है, जब सरकार द्वारा पेश किया गया कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में पारित होने में विफल रहा। महिला आरक्षण कानून में संशोधन और संसदीय क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) से जुड़े इस विधेयक के पक्ष में 298 मत पड़े, जबकि विपक्ष ने एकजुट होकर इसके विरोध में 230 वोट डाले।

राजनीतिक टकराव और दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा

विपक्ष ने इस विधेयक को सरकार की ‘राजनीतिक साज़िश’ करार दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का तर्क है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना दक्षिण भारतीय राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को कम करने का एक प्रयास था। विपक्ष के अनुसार, परिसीमन के माध्यम से उत्तर भारत की सीटें बढ़ने से केंद्र की राजनीति में एकतरफा क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होने का डर था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे विपक्ष द्वारा खींची गई ‘लक्ष्मण रेखा’ बताया, जिसे सरकार पार नहीं कर सकी।

सरकार की मंशा और चुनावी रणनीति

बीजेपी ने इस विधेयक को नारी शक्ति के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया था। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जोर दिया कि यह देश की दिशा बदलने वाला बिल है और विपक्ष का विरोध महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दो-तिहाई बहुमत की कमी और एनडीए के कुछ सांसदों की अनुपस्थिति ने सरकार की स्थिति कमजोर कर दी। जानकारों के अनुसार, चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना बंगाल जैसे राज्यों में महिला वोट बैंक को साधने की एक रणनीति हो सकती थी।

संभावित प्रभाव और साख पर सवाल

विधेयक के गिरने को सरकार की साख के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव आगामी परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा पर पड़ेगा। अब यह मुद्दा चुनावी मैदान में एक बड़े हथियार के रूप में उभरेगा, जहाँ बीजेपी विपक्ष पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप लगाएगी, वहीं विपक्ष इसे ‘संविधान और संघवाद की जीत’ के रूप में पेश करेगा। तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की अधिसूचना जारी कर दी है।

एक झलक में

  • लोकसभा में 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिरा; पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े।
  • मोदी सरकार के 12 साल के सफर में पहली बार कोई संवैधानिक संशोधन बिल सदन में विफल हुआ।
  • विपक्ष ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का कड़ा विरोध करते हुए इसे क्षेत्रीय भेदभाव बताया।
  • सरकार ने विधेयक के गिरने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे महिलाओं के हक पर प्रहार करार दिया।