भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि, अमेरिकी पाबंदियों के बीच रूस से तेल खरीद जारी रखने का बड़ा फैसला

भारत की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि, अमेरिकी पाबंदियों के बीच रूस से तेल खरीद जारी रखने का बड़ा फैसला

ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता दी है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों की परवाह किए बिना रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका द्वारा दी गई छूट की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और 1.4 अरब की आबादी के हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल आयात बंद नहीं करेगा।

ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हित

भारत का यह निर्णय शुद्ध रूप से घरेलू बाजार की स्थितियों और समग्र ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। हालांकि, अरब देशों से तेल मंगाना सस्ता और कम समय लेने वाला है, लेकिन रूस के साथ गहरे व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों के कारण भारत इस साझेदारी को कमजोर नहीं होने देना चाहता। सरकार का मानना है कि तेल खरीद का फैसला किसी बाहरी दबाव के बजाय बाजार की कीमतों और देश की जरूरत के आधार पर होना चाहिए।

पाबंदियों का तोड़ और नया रोडमैप

अमेरिकी पाबंदियों से निपटने के लिए भारत ने अपनी खरीद प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन की योजना बनाई है। प्रतिबंध मुख्य रूप से उन कंपनियों पर होते हैं जो इस व्यापार में संलग्न हैं, इसलिए भारत अब ऐसी कंपनियों के जरिए तेल नहीं खरीदेगा जो प्रतिबंधित सूची में हैं। इसके बजाय नए विकल्पों और सुरक्षित माध्यमों की तलाश की जा रही है। वर्तमान में भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 38 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से मंगा रहा है, जो इसकी वैश्विक निर्भरता को दर्शाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन में बाधा भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसी कारण भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार की बहाली की मांग की है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से तेल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

एक झलक में

  • भारत ने अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का फैसला किया है।
  • रूसी तेल की खरीद प्रक्रिया में बदलाव कर प्रतिबंधित कंपनियों के बजाय नए विकल्पों का उपयोग किया जाएगा।
  • वर्तमान में भारत रूस से अपनी जरूरत का 38% कच्चा तेल आयात कर रहा है।
  • भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वैश्विक व्यापार और जहाजों के निर्बाध आवागमन की पुरजोर वकालत की है।