शेख हसीना से नीरव मोदी तक, भारत का कड़ा रुख और लेबनान में शांति की उम्मीद!

विदेश मंत्रालय: पश्चिम एशिया में शांति का स्वागत, पड़ोसी देशों के लिए भारत बना ऊर्जा का बड़ा संबल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लेबनान और इजराइल के बीच हुए संघर्ष विराम का स्वागत करते हुए इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस पूरे क्षेत्र की अस्थिरता पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। इसी क्रम में, भारत ने पश्चिम एशिया की मौजूदा चुनौतियों के बीच क्षेत्रीय देशों को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति (पेट्रोलियम उत्पाद) जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे नेपाल, श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश जैसे देशों को बड़ी राहत मिली है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत एक विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाए हुए है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सक्रियता
भारत ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अपने रुख को कायम रखते हुए कहा है कि इस पर कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी ब्रिटेन-फ्रांस द्वारा आयोजित बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है। गौरतलब है कि भारत ने जलवायु शिखर सम्मेलन (COP) की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली है, हालांकि देश वैश्विक जलवायु वार्ताओं में अपनी भागीदारी जारी रखेगा। साथ ही, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की आगामी यात्रा का जिक्र करते हुए इसे सेमीकंडक्टर और शिपबिल्डिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने वाला कदम बताया गया है।
आंतरिक मामलों पर स्पष्ट रुख
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने PoK और सीमांकन (डिलिमिटेशन) पर किसी भी बाहरी देश की टिप्पणी को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया भारत का पूरी तरह से आंतरिक मामला है और इस पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार वांछित अपराधियों को वापस लाने के लिए ब्रिटेन के साथ लगातार संपर्क में है और इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
एक नजर में
- क्षेत्रीय शांति: भारत ने इजराइल-लेबनान सीजफायर का स्वागत किया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही।
- ऊर्जा कूटनीति: भारत ने पड़ोसी देशों (बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान) को पेट्रोलियम आपूर्ति जारी रखने की पुष्टि की।
- रणनीतिक नीति: शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर पुरानी प्रक्रिया कायम; भारत COP मेजबानी की दौड़ से बाहर, लेकिन जलवायु वार्ता में सक्रिय रहेगा।
- आंतरिक संप्रभुता: PoK और सीमांकन के मुद्दों पर भारत ने किसी भी बाहरी दखल को पूरी तरह खारिज किया।
