लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर इंदिरा गांधी ने आखिर क्यों लगाई थी रोक!

साल 1976 में इंदिरा गांधी सरकार ने एक कानून पारित कर लोकसभा सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के आधार पर 545 पर फ्रीज कर दिया था। इस फैसले के पीछे मुख्य तर्क यह था कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों में तेजी से जुटे थे, उनकी संसदीय सीटें कम न हो जाएं। सरकार का मानना था कि यदि सीटों की संख्या आबादी के हिसाब से बढ़ती रही, तो जनसंख्या नीति पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
जनसंख्या नीति और राजनीतिक विवाद तत्कालीन विशेषज्ञों का अनुमान था कि साल 2001 तक देश में जनसंख्या स्थिरता का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। हालांकि, उस समय इंदिरा गांधी पर सत्ता बचाने के लिए ऐसा करने के आरोप भी लगे थे। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस रोक को बढ़ाकर 2026 तक कर दिया। वर्तमान में यह मुद्दा फिर से चर्चा में है क्योंकि 2026 के बाद होने वाला परिसीमन राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
एक झलक में
- 1976 में 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को 545 पर स्थिर किया गया।
- इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों के प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखना था।
- साल 2001 में अटल सरकार ने इस पाबंदी को 2026 तक के लिए बढ़ा दिया।
- 2026 के बाद सीटों के नए निर्धारण से क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
