महिला आरक्षण बिल पर संसद में महासंग्राम, क्या सरकार कर पाएगी पास?

संसद का विशेष सत्र: चुनावी सुधारों पर घमासान, आज शाम होगी अहम वोटिंग
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक पेश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को महिलाओं का अधिकार बताते हुए इसे निर्णय प्रक्रिया के लिए अनिवार्य बताया, वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना और जाति-आधारित गिनती की प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक गतिरोध और बहुमत की चुनौती
विपक्ष ने सरकार के इन विधेयकों को राजनीतिक लाभ से प्रेरित बताया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने और जनगणना में देरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है। संवैधानिक संशोधन के लिए सदन में दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की अनिवार्यता है। वर्तमान में एनडीए के पास 293 सीटें हैं, जो लक्ष्य से 67 कम हैं। वहीं, विपक्ष के पास 241 सदस्य हैं, जिससे आज शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग में सस्पेंस बढ़ गया है। यदि एनडीए अपने सहयोगियों और अन्य दलों को साधने में विफल रहता है, तो इन विधेयकों का पारित होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एक नजर में
- संसद के विशेष सत्र में संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन प्रमुख विधेयक पेश किए गए हैं।
- सरकार इन बदलावों को चुनावी ढांचे को मजबूत करने का माध्यम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक कदम करार दिया है।
- संवैधानिक संशोधन पारित करने के लिए 360 मतों की आवश्यकता है, जबकि एनडीए के पास वर्तमान में 293 सीटें ही हैं।
- इन विधेयकों पर राजनीतिक सहमति की स्थिति आज शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग से स्पष्ट हो जाएगी।
