महिला आरक्षण पर घमासान, क्या कांग्रेस का विरोध है सही?

महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के कार्यान्वयन पर अधिसूचना जारी
केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण अधिनियम 2023) को आधिकारिक रूप से लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। कानून मंत्रालय द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन के तहत 16 अप्रैल, 2026 से इस कानून के प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है, जिससे विधायी निकायों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
कानून की प्रक्रिया और तकनीकी पेच
सरकार के इस कदम पर राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एक ओर जहां अधिकारी इसे “तकनीकी कारणों” से उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे ‘विचित्र’ करार दिया है। कानून के वर्तमान स्वरूप के अनुसार, यह आरक्षण व्यवस्था जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही व्यावहारिक रूप से लागू हो सकेगी। इसी प्रावधान के चलते माना जा रहा है कि जमीनी स्तर पर आरक्षण का लाभ मिलने में समय लग सकता है और यह 2034 से पहले पूर्णतः प्रभावी होना कठिन है।
संशोधन और राजनीति का प्रभाव
यह अधिसूचना ऐसे समय में जारी की गई है जब संसद में इसी कानून से संबंधित संशोधनों पर बहस जारी है, ताकि आरक्षण को 2029 के चुनावों तक प्रभावी बनाया जा सके। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब सदन में संशोधन प्रक्रिया चल रही है, तो इस प्रकार की अधिसूचना असमंजस पैदा करती है। हालांकि, विपक्ष के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि मौजूदा संसद की सीटों पर ही इस अधिसूचना के जरिए आरक्षण लागू किया जाए, तो यह महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
एक नजर में
- प्रमुख प्रावधान: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण।
- अधिसूचना तिथि: कानून 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी माना गया है।
- लागू होने की प्रक्रिया: अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के अनिवार्य शर्तों से जुड़ा है।
- आरक्षण का दायरा: SC/ST के लिए आरक्षित सीटों के अंदर भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा।
