पंजाब में रेल रोको आंदोलन टला, किसानों ने सरकार को दिया 3 दिन का समय!

पंजाब में गेहूं खरीद संकट: किसानों ने फिलहाल टाला रेल रोको आंदोलन
पंजाब में गेहूं की सुस्त खरीद और मंडियों में पड़े अनाज को लेकर उपजे आक्रोश के बीच, किसान संगठनों ने अपना प्रस्तावित ‘रेल रोको’ आंदोलन तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। आजाद किसान मोर्चा (AKM) ने यह निर्णय पंजाब सरकार द्वारा वार्ता के लिए तीन दिन का समय मांगे जाने के बाद लिया है। किसान नेताओं के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्र से फसल खरीद में ढील देने की मांग को लेकर पत्र लिखा है, जिसके मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
समस्या का मूल और सरकार का रुख
अनाज खरीद में इस गतिरोध का मुख्य कारण भारतीय खाद्य निगम (FCI) के कड़े मानक हैं, जो गेहूं के दाने की नमी, रंग और गुणवत्ता के आधार पर खरीद करते हैं। बेमौसम बारिश और गर्मी के कारण प्रभावित फसल इन मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही है, जिससे मंडियों में अनाज का ढेर लग गया है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने घोषणा की है कि FCI की ओर से नियमों में ढील देने की सिफारिश की गई है ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
आंदोलन के संभावित प्रभाव और भविष्य की स्थिति
यदि सरकार द्वारा दी गई मोहलत के भीतर खरीद प्रक्रिया सुचारू नहीं होती है, तो किसान संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। लंबे समय तक चलने वाला यह गतिरोध जहां एक ओर राज्य की कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, वहीं मंडियों में अनाज का अंबार किसानों के मानसिक और आर्थिक तनाव का बड़ा कारण बना हुआ है। फिलहाल, सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी वार्ता और केंद्र द्वारा नियमों में दी जाने वाली औपचारिक ढील पर टिकी हैं।
एक नजर में
- पंजाब में गेहूं खरीद में देरी के विरोध में किसानों ने ‘रेल रोको’ आंदोलन तीन दिन के लिए स्थगित किया।
- मंडियों में बेमौसम बारिश से प्रभावित फसल के मानक पूरे न होने के कारण FCI द्वारा खरीद ठप थी।
- केंद्र सरकार ने खरीद नियमों में ढील देने की सिफारिश की है, जिस पर किसानों की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
- सरकार और किसान संगठनों के बीच अगले तीन दिनों तक वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
