अलग शहरों में नौकरी करने वाले पति-पत्नी को बड़ी राहत! HRA पर कलकत्ता हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

पश्चिम बंगाल में रोजगार और नौकरियों के सिलसिले में अलग-अलग शहरों में रहने के लिए मजबूर पति-पत्नी के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। कार्यस्थल की अत्यधिक दूरी के कारण एक साथ न रह पाने वाले दंपत्तियों के मकान किराया भत्ता (HRA) कटौती से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार के रुख को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि भौगोलिक दूरी के कारण पति-पत्नी का रोज आना-जाना संभव नहीं है, तो उन्हें उनके वैध भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह पूरा मामला दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर की एक स्कूल शिक्षिका की याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता शिक्षिका के पति शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। दोनों के कार्यस्थलों के बीच की दूरी लगभग 194.4 किलोमीटर है, जिसके कारण दैनिक रूप से एक साथ रहना पूरी तरह से असंभव है। इसके बावजूद, राज्य प्रशासन ने एचआरए की अधिकतम सीमा का हवाला देते हुए शिक्षिका पर अतिरिक्त भत्ता लेने का आरोप लगाया और जबरन उनके वेतन से राशि वसूल कर सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में जमा करा दी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने वर्ष 2011 के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार, यदि पति-पत्नी के कार्यस्थलों के बीच की दूरी दैनिक आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं है, तो कर्मचारी पूरा मकान किराया भत्ता पाने का हकदार है। जस्टिस सिन्हा ने शिक्षिका से जबरन की गई वसूली के फैसले को रद्द करते हुए दक्षिण 24 परगना के जिला विद्यालय निरीक्षक (DI) को निर्देश दिया कि वे जमा की गई राशि को ट्रेजरी में जमा होने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ तुरंत वापस करें।
इसी तरह के एक अन्य मामले में, बीरभूम की एक शिक्षिका का अपने पति के कार्यस्थल से अंतर 90 किलोमीटर से अधिक था। अदालत ने स्कूल शिक्षा आयुक्त को निर्देश दिया कि मामले को लंबित रखने के बजाय शिक्षिका का पूरा एचआरए तुरंत स्वीकृत किया जाए। कलकत्ता हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के विभिन्न सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों में कार्यरत उन हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जो ट्रांसफर या अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग के कारण अपने जीवनसाथी से दूर रहकर नौकरी करने को मजबूर हैं।
