परिसीमन का विरोध क्यों, अमित शाह ने संसद में खोल दी पोल!

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर गृहमंत्री का पक्ष, 2029 चुनाव को लेकर बड़ा संकेत
लोकसभा में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चली बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। शाह ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उद्देश्य महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देना है, ताकि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन और आरक्षण का क्रियान्वयन संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे जनगणना के बाद चरणों में लागू किया जाएगा।
परिसीमन और प्रतिनिधित्व का गणित
गृहमंत्री ने परिसीमन के विरोध को एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा समय में देश में 127 ऐसी सीटें हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक है, जबकि कुछ क्षेत्रों में आंकड़ा काफी कम है। सरकार का मानना है कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य’ के संवैधानिक सिद्धांत को बनाए रखने के लिए परिसीमन अनिवार्य है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर दोष मढ़ते हुए कहा कि लंबे समय तक परिसीमन प्रक्रिया को बाधित रखने के कारण देश में उचित प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ गया था।
जातीय जनगणना पर स्थिति स्पष्ट
विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ओबीसी प्रतिनिधित्व और जनगणना के सवालों पर अमित शाह ने घोषणा की कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2026 की जनगणना को जाति आधारित आधार पर कराने का निर्णय लिया है। सरकार का यह कदम भविष्य में आरक्षण के दायरे को और अधिक स्पष्ट करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। इन विधेयकों पर बहस के बाद अब सदन में मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एक नजर में
- 2029 के लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराने का लक्ष्य।
- परिसीमन प्रक्रिया से एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने पर सरकार का जोर।
- वर्तमान में 127 लोकसभा सीटों पर 20 लाख से अधिक मतदाताओं का असंतुलन।
- 2026 की आगामी जनगणना जातिगत आधार पर कराने की आधिकारिक घोषणा।
