“तिरंगा फहराना कब से गुनाह हो गया?”-जंतर-मंतर पर गिरफ्तारी के बाद सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने सरकार पर बोला तीखा हमला।

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं आशुतोष रांका, सौरभ दास और अजिंक्य शिंदे को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सियासी भूचाल आ गया है। इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई को खुली तानाशाही करार देते हुए कहा कि जो लोग जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को गैर-कानूनी या अपराध मानते हैं, असल में वही लोग देशद्रोही हैं।
घटना के संदर्भ में कड़ा रोष व्यक्त करते हुए अभिजीत दिपके ने पुलिस की कार्यप्रणाली की नैतिक और कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि तिरंगा फहराने के लिए भला देश के किसी नागरिक को कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है? यह किस तरह का शासन और तंत्र है? हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि गिरफ्तार किए गए लोगों को उनके वकीलों से तुरंत बात करने की अनुमति दी जानी चाहिए। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि उन्हें बिना कानूनी सहायता के 24 घंटे तक नजरबंद रखा जाए, जैसा कि पूर्व में उनके साथ किया गया था।
दिपके ने सरकार पर सार्वजनिक स्थानों को अपनी निजी जागीर और संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की यह तानाशाही सोच नहीं चाहती कि कोई भी आम नागरिक जंतर-मंतर जाकर तिरंगा फहरा सके, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह का नाम नहीं है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ नागरिकों की विरोध की भावना और प्रतीक है। उन्होंने अपने इस संकल्प को फिर से दोहराया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक सीजेपी का यह विरोध प्रदर्शन और संघर्ष किसी भी कीमत पर थमेगा नहीं।
