ड्रोन और नेटवर्किंग से सुरक्षित होगा भारत, क्या है नया ब्रह्मास्त्र!

भारतीय सेना का भविष्य: तकनीक और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रही आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस
भारतीय सेना की चार दिवसीय ‘आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस’ 16 अप्रैल को संपन्न हो गई। सेना प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), रक्षा सचिव और सरकार के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सरकार और सेना के बीच तालमेल को और अधिक प्रभावी बनाना तथा बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप संयुक्त रणनीति तैयार करना था। बैठक में स्पष्ट किया गया कि भविष्य के युद्ध अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित युद्धक प्रणालियों की भूमिका निर्णायक होगी।
नेटवर्किंग और आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर
सेना ने वर्ष 2026 को ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी’ का वर्ष घोषित किया है, जो भविष्य के युद्धों में त्वरित निर्णयों और बेहतर समन्वय के लिए महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में ड्रोन और एंटी-ड्रोन (C-UAS) प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल पर विशेष मंथन किया गया, जो हालिया सैन्य अनुभवों से मिली सीख पर आधारित है। इसके साथ ही, सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए स्वदेशी रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को अनिवार्य बताया गया ताकि वैश्विक सप्लाई चेन संबंधी संकटों का प्रभाव सेना पर न पड़े। यह कॉन्फ्रेंस दर्शाती है कि भारतीय सेना भविष्य की किसी भी अनिश्चितता और तकनीकी युद्ध के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
एक नजर में
- रणनीतिक बदलाव: 2026 को आधिकारिक तौर पर ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी’ का वर्ष घोषित किया गया।
- तकनीकी फोकस: ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के साथ-साथ युद्धक्षेत्र में आधुनिक तकनीक के एकीकरण को प्राथमिकता।
- अंतर-विभागीय तालमेल: सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना, सरकार और अन्य नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर।
- आत्मनिर्भरता: रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और वैश्विक सप्लाई चेन निर्भरता कम करने का संकल्प।
