पवन खेड़ा के लिए सुप्रीम कोर्ट से फिर बड़ा झटका, बेल के लिए अब असम का रुख!
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका: असम की अदालत में जाने की सलाह
कानूनी अधिकार क्षेत्र पर सर्वोच्च अदालत का स्पष्ट रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उन्हें राहत देने से साफ मना कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि असम में दर्ज मामले का अधिकार क्षेत्र केवल वहां की अदालत के पास है, इसलिए किसी अन्य राज्य या उच्च न्यायालय से राहत मांगना कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम जमानत पर भी रोक लगा दी थी, क्योंकि उस मामले में प्रक्रियात्मक खामियां पाई गई थीं।
विवाद की जड़: प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोपों का दौर
यह पूरा विवाद 5 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से उपजा है, जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर फर्जी पासपोर्ट रखने और विदेश में संपत्ति होने के गंभीर आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मानहानि और धोखाधड़ी का मामला करार दिया। इसके बाद असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया और उनके दिल्ली स्थित आवास पर दबिश भी दी।
दस्तावेजों में विसंगति और कानूनी पेच
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी असंतोष जताया कि कैसे तेलंगाना से जमानत प्राप्त करने के लिए कथित रूप से गलत पते वाले आधार कार्ड का उपयोग किया गया। हालांकि खेड़ा का पक्ष मंगलवार तक जमानत की मांग कर रहा था ताकि वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अब इस घटनाक्रम के बाद पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उन्हें असम की न्यायिक प्रक्रिया का ही सामना करना होगा।
एक नजर में
- पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया।
- कोर्ट ने याचिकाकर्ता को असम की अदालत में जाने का दिया निर्देश, क्षेत्राधिकार पर दिया जोर।
- मामला 5 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए फर्जी पासपोर्ट और मानहानि के आरोपों से जुड़ा है।
- तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है।
