‘क्या मैं आतंकवादी हूं’ पवन खेड़ा के इस सवाल ने कोर्ट में मचाई हलचल!

‘क्या मैं आतंकवादी हूं’ पवन खेड़ा के इस सवाल ने कोर्ट में मचाई हलचल!

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, गिरफ्तारी का खतरा बरकरार

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक और कानूनी झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर अपना स्टे बरकरार रखा है। इस निर्णय के चलते खेड़ा पर असम पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें नियमित जमानत के लिए अब गुवाहाटी हाई कोर्ट का ही दरवाजा खटखटाना होगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा के वकील की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मामले की मेरिट पर सुनवाई का अधिकार गुवाहाटी हाई कोर्ट का है।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

यह विवाद 4 अप्रैल को पवन खेड़ा द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि रिनिकी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और दुबई में उनके नाम पर लग्जरी संपत्तियां हैं, जिन्हें एक अमेरिकी कंपनी के तहत पंजीकृत किया गया है। दूसरी ओर, सरमा परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें एआई द्वारा तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज करार दिया है। इस मामले में गुवाहाटी में दर्ज एफआईआर के बाद से पुलिस की सक्रियता काफी बढ़ गई है।

इस घटनाक्रम के कारण राजनीतिक और कानूनी स्तर पर हलचल तेज हो गई है। पुलिस की ओर से दिल्ली स्थित उनके आवास पर सर्च अभियान चलाए जाने के बाद से खेड़ा के लिए कानूनी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान खेड़ा की तरफ से गलत आधार कार्ड जमा करने पर अपनी नाराजगी भी जताई है। वर्तमान स्थिति यह है कि जब तक गुवाहाटी हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तब तक पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की संभावना बनी रहेगी, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ी कानूनी उलझन साबित हो रही है।

एक नजर में

  • सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल पर लगी रोक जारी रखी।
  • असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गए आरोपों को लेकर गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज की गई है।
  • सरमा परिवार ने खेड़ा के दावों को फर्जी दस्तावेज बताकर खारिज किया है।
  • पवन खेड़ा को अब नियमित जमानत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट में अपील करनी होगी।

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