अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुका भारत, रूस से तेल खरीद जारी रखने का बड़ा फैसला!

रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर और भारत का रुख
अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर दी गई 30 दिन की छूट को समाप्त करने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी वित्त विभाग ने आर्थिक सख्ती बढ़ाते हुए प्रतिबंधों को फिर से प्रभावी कर दिया है, जिसका सीधा असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल और एलपीजी की खरीद जारी रखेगी। भारत का मानना है कि विदेश नीति और व्यापारिक निर्णय पूरी तरह से उसकी अपनी जरूरतों पर आधारित हैं, न कि किसी अन्य देश के प्रतिबंधों पर।
रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा
भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियां उन कंपनियों और जहाजों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी जो मौजूदा प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते हैं। वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल खपत का बड़ा हिस्सा रूस से आयात कर रहा है, जिसमें हालिया महीनों में 148 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापारिक मार्गों में अनिश्चितता के बीच, भारत के लिए रूस एक भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। तेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आयात का निर्णय विशुद्ध रूप से तकनीकी और आर्थिक लाभ के आधार पर लिया जाता है, ताकि घरेलू मांग को सुगमता से पूरा किया जा सके।
एक नजर में
- अमेरिकी सरकार ने रूस से तेल खरीद के लिए दी गई 30 दिन की छूट समाप्त कर दी है।
- भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा नीति अमेरिकी प्रतिबंधों के बजाय घरेलू मांग पर आधारित है।
- भारतीय रिफाइनरियां गैर-प्रतिबंधित माध्यमों से रूसी कच्चे तेल और एलपीजी का आयात जारी रखेंगी।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल तेल आयात में रूसी हिस्सेदारी लगभग 35.8 प्रतिशत रही है।
