“दूसरों की कीमत पर नहीं, पूरी दुनिया के साथ तरक्की करता है भारत!” ब्लूमबर्ग फोरम में पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बुनियाद और लगातार हो रहे व्यापक नीतिगत सुधारों पर आधारित है। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाकर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समृद्धि में भागीदार बनकर अपनी आर्थिक भूमिका का विस्तार करना चाहता है। अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव से भरी इस दुनिया में भारत एक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश की मजबूत व्यापक आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) स्थिति के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो देश की मजबूत अंदरूनी आर्थिक क्षमता को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है। 12-13 साल पहले भारत का चालू खाते का घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट) जीडीपी के 4 प्रतिशत से अधिक था, जो अब घटकर केवल आधा प्रतिशत के करीब रह गया है। बैंकिंग, श्रम कानूनों, कर प्रणाली और दिवाला संहिता में किए गए ऐतिहासिक सुधारों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए आर्थिक सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प हैं।”
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन), महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और तकनीक को लेकर बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने दुनिया को आगाह किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में इन संसाधनों का इस्तेमाल कुछ ताकतों द्वारा दबाव बनाने और अपनी बात मनवाने के साधनों के रूप में किया जा रहा है। ऐसे दौर में भारत समावेशी विकास, भरोसेमंद साझेदारी और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार का समर्थन करता है। भारत अपनी डिजिटल पहचान, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का अनुभव वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के विकासशील देशों के साथ साझा कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी देश की वास्तविक ताकत का आकलन केवल इस बात से नहीं होना चाहिए कि उसके पास कितनी शक्ति है, बल्कि इससे होना चाहिए कि वह दूसरों के लिए प्रगति के अवसर पैदा करने में उस शक्ति का कितना प्रभावी इस्तेमाल करता है। भारत की विकास यात्रा केवल घरेलू उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर तकनीक, प्रतिभा और स्थायी समाधान उपलब्ध कराने का माध्यम बन रही है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, एआई, जनस्वास्थ्य और वैश्विक आर्थिक सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।
