विश्वकप विजेता भारत की नायिका प्रतीका को क्यों नहीं मिला मेडल?

भारत की विश्वकप जीत में अहम भूमिका निभाने वाली प्रतीका रावाल आज सुर्खियों में हैं—लेकिन खुशी से ज़्यादा सवालों के साथ। 25 वर्षीय ओपनर ने पूरे टूर्नामेंट में 308 रन बनाकर टीम को मज़बूत शुरुआत दी, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 122 रहा। स्मृति मंधाना के साथ उनकी जोड़ी भारत की जीत की नींव साबित हुई। लेकिन चोट लगने के कारण वह सेमीफाइनल और फाइनल नहीं खेल पाईं। फाइनल में उनकी जगह ली शैफाली वर्मा ने, जिन्होंने 78 गेंदों पर 87 रन बनाकर भारत की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया।

हालांकि, टीम के साथ खड़ी रहकर जश्न मनाने के बावजूद प्रतीका रावाल को विजेता का मेडल नहीं मिला। दरअसल, ICC के नियमों के अनुसार विश्वकप की ट्रॉफी के साथ केवल 15 सदस्यीय स्क्वाड को ही विजेता पदक दिए जाते हैं। चोट के चलते प्रतीका को स्क्वाड से बाहर कर दिया गया था, और उनकी जगह शैफाली को शामिल किया गया था।

इससे पहले भी क्रिकेट इतिहास में ऐसा मामला सामने आ चुका है। 2003 पुरुष विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ जेसन गिलेस्पी ने चार मैचों में आठ विकेट लिए थे, लेकिन चोट की वजह से बाहर होने पर उन्हें भी मेडल से वंचित रहना पड़ा। प्रतीका का मामला एक बार फिर यही सवाल उठाता है—क्या योगदान की गिनती सिर्फ खेलने वाले 15 तक ही सीमित रहनी चाहिए?