महिला आरक्षण और सीट वृद्धि विधेयक गिरा, अमित शाह ने विपक्ष के जश्न को बताया नारी शक्ति का अपमान

लोकसभा में विधायी निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण विफल हो गया। इस विधेयक का लक्ष्य 2029 के संसदीय चुनावों से पहले लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करना था, ताकि महिला प्रतिनिधित्व को सुगमता से समायोजित किया जा सके। सदन में मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।
विपक्ष पर तीखा प्रहार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक के गिरने पर विपक्षी दलों द्वारा मनाए गए जश्न की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह देश की 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात है। शाह के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम की राह में रोड़ा अटकाकर इन दलों ने महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया है, जो दशकों से प्रतीक्षित थे।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की राह
इस विधायी विफलता का प्रभाव आगामी चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है। गृह मंत्री ने चेतावनी दी है कि विपक्षी दलों को न केवल 2029 के लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर पर महिला मतदाताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। यह प्रस्तावित कानून 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद सीटों के विस्तार और राज्य विधानसभाओं में भी महिला आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त करने वाला था, जिस पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
एक झलक में
- लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने वाला संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिरा।
- बहुमत के लिए 352 मतों की जरूरत थी, लेकिन पक्ष में केवल 298 वोट ही पड़े।
- अमित शाह ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया।
- विधेयक का उद्देश्य 2029 तक विधायी निकायों में 33% महिला आरक्षण लागू करना था।
