महिला आरक्षण पर संसद में हारकर भी कैसे जीत का नैरेटिव गढ़ रही है भाजपा, बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के लिए तैयार है खास प्लान

महिला आरक्षण पर संसद में हारकर भी कैसे जीत का नैरेटिव गढ़ रही है भाजपा, बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के लिए तैयार है खास प्लान

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक का गिरना भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे गया है। हालांकि सदन में भाजपा के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत (360 वोट) का अभाव था, जिसके कारण बिल 54 वोटों से गिर गया, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस ‘हार’ को भी एक बड़े चुनावी नैरेटिव में बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकेतों से साफ है कि पार्टी अब इसे विपक्ष द्वारा महिलाओं के हक में डाली गई बाधा के रूप में जनता के बीच ले जाएगी।

विपक्ष के लिए दोहरी चुनौती और भाजपा का गेम प्लान

भाजपा की रणनीति इस मुद्दे पर ‘विन-विन’ की स्थिति पैदा करना है। यदि बिल पास होता, तो पार्टी इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताती, लेकिन अब बिल गिरने के बाद भाजपा इसे विपक्षी दलों—कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके—के खिलाफ ‘महिला विरोधी’ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने को तैयार है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार सीटों की संख्या 50% बढ़ाने को तैयार थी, ताकि किसी राज्य का नुकसान न हो, लेकिन विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर इसे रोक दिया।

बंगाल और तमिलनाडु चुनाव पर सीधा असर

संसद के इस विशेष सत्र की टाइमिंग को सीधे तौर पर आगामी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। बंगाल में भाजपा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के महिला वोट बैंक के किले में सेंध लगाने के लिए ‘ममता बनाम महिला आरक्षण’ का मुद्दा बनाएगी। वहीं, दक्षिण भारत में डीएमके द्वारा परिसीमन का विरोध किए जाने को भाजपा महिलाओं के 33% आरक्षण की राह में रुकावट बताकर प्रचारित करेगी।

परिसीमन का पेंच और भविष्य की राजनीति

विपक्ष का मुख्य विरोध महिला आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने पर है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सरकार महिलाओं के कंधे पर बंदूक रखकर चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। हालांकि, सरकार का दावा है कि परिसीमन एक संवैधानिक आवश्यकता है और इससे किसी राज्य की शक्ति कम नहीं होगी। फिलहाल, 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव अब एक बड़े सियासी चक्रव्यूह का रूप ले चुका है।

एक झलक में

  • लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल ‘विशेष बहुमत’ न मिलने के कारण 54 वोटों से गिर गया।
  • भाजपा अब चुनावी मैदान में विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ साबित करने का नैरेटिव सेट कर रही है।
  • बंगाल और तमिलनाडु के आगामी मतदान में महिला आरक्षण को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा।
  • विपक्ष परिसीमन को लेकर आशंकित है, जबकि सरकार इसे आरक्षण लागू करने के लिए अनिवार्य बता रही है।