धूम्रपान की लत छीन सकती है आपकी याददाश्त, नए शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

धूम्रपान केवल फेफड़ों और हृदय को ही नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि यह आपकी याददाश्त को भी पूरी तरह मिटा सकता है। हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध ने धूम्रपान और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) के बीच एक गहरा और चिंताजनक संबंध स्थापित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट का हर कश सीधे तौर पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिससे भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
मस्तिष्क पर निकोटीन का प्रहार
शोध के अनुसार, सिगरेट में मौजूद निकोटीन शरीर में प्रवेश करते ही फेफड़ों की विशेष कोशिकाओं, जिन्हें ‘पल्मोनरी न्यूरोएंडोक्राइन सेल्स’ (PNECs) कहा जाता है, को प्रभावित करता है। ये कोशिकाएं फेफड़ों और मस्तिष्क के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निकोटीन के प्रभाव से ये कोशिकाएं मस्तिष्क को गलत रासायनिक संकेत भेजने लगती हैं, जिससे न्यूरॉन्स को क्षति पहुँचती है और मस्तिष्क में सूजन पैदा हो सकती है।
न्यूरोन्स की क्षति और डिमेंशिया का खतरा
वैज्ञानिकों ने पाया कि निकोटीन के कारण ये कोशिकाएं ‘एक्सोसोम’ नामक सूक्ष्म कण छोड़ती हैं, जो मस्तिष्क में पहुंचकर आयरन का संतुलन बिगाड़ देते हैं। इससे न्यूरॉन्स पर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है, जो कोशिका मृत्यु और डिमेंशिया का मुख्य कारण बनता है। यह प्रक्रिया ‘लंग-ब्रैन एक्सिस’ के माध्यम से काम करती है, जो यह स्पष्ट करती है कि श्वसन तंत्र में होने वाली गड़बड़ी सीधे तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बिगाड़ सकती है।
एक झलक में
- धूम्रपान और डिमेंशिया के बीच सीधा संबंध सामने आया है।
- निकोटीन के कारण फेफड़ों की कोशिकाएं मस्तिष्क को गलत संकेत भेजती हैं।
- मस्तिष्क में आयरन का असंतुलन और ऑक्सीडेटिव तनाव याददाश्त को खत्म कर देता है।
- लंबे समय तक धूम्रपान करने से न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
