भारतीय रेल में रफ्तार का नया अध्याय, अब 220 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ेंगी ट्रेनें!

भारतीय रेल में रफ्तार का नया अध्याय, अब 220 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ेंगी ट्रेनें!

भारतीय रेलवे अपनी दशकों पुरानी ‘धीमी रफ्तार’ वाली छवि को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। चेन्नई स्थित इंटीग्रাল कोच फैक्ट्री (ICF) को देश की पहली ऐसी यात्री ट्रेनें बनाने का जिम्मा सौंपा गया है, जो 220 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार छू सकेंगी। रेलवे बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर 16 कोच वाली दो ऐसी ट्रेनों के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वित्त वर्ष 2027-28 तक पटरियों पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है।

अत्याधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचा

इन हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण ब्रॉड गेज लाइनों के लिए किया जाएगा और इनके कोच पूरी तरह से स्टील से बने होंगे। इस परियोजना के लिए बेंगलुरु की ‘भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड’ (BEML) के साथ तकनीकी तालमेल किया गया है। पूरी परियोजना की लागत लगभग 866.87 करोड़ रुपये आंकी गई है। वर्तमान में भारत की सबसे तेज ट्रेन वंदे भारत (स्लीपर) है जिसकी गति 180 किमी प्रति घंटा है, लेकिन नई परियोजना भारतीय रेल को वैश्विक मानकों के करीब ले जाएगी।

सुरक्षा और सुगम यात्रा पर जोर

रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे सुरक्षा प्रणाली को भी आधुनिक बना रहा है। अब पुलों और क्रॉसिंग के पास पारंपरिक कंक्रीट के बजाय ‘कंपोजिट स्लीपर’ का उपयोग किया जाएगा, जो हल्के होने के साथ-साथ अधिक वजन सहने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, पटरियों की वेल्डिंग में किसी भी सूक्ष्म खामी का पता लगाने के लिए ‘मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग’ तकनीक अपनाई जा रही है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को झटकों से मुक्त और सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।

एक झलक में

  • चेन्नई की ICF में 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली दो नई ट्रेनों का निर्माण शुरू।
  • रेलवे बोर्ड ने 16 कोच वाली इन ट्रेनों को 2027-28 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
  • इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 866.87 करोड़ रुपये है।
  • सुरक्षा के लिए ट्रैक पर कंपोजिट स्लीपर और मैग्नेटिक टेस्टिंग जैसी नई तकनीक का होगा उपयोग।