“जिस प्रक्रिया से जीते, उसी पर उठा दिए सवाल…”: चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव पास कर अपनी ही जीत पर संकट ले आई केरल सरकार!

देश के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक अनोखा और विरोधाभास से भरा संकट खड़ा हो गया जब केरल की यूडीएफ (UDF) सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर विधानसभा में एक तीखा प्रस्ताव पारित कर दिया। यह कदम जितना राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से चौंकाने वाला है, उतना ही राज्य की कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ता दिख रहा है। महज पांच महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता में आने वाली कांग्रेस पार्टी पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसी चुनावी जनादेश, प्रक्रिया और पूरी विधानसभा की वैधता को लेकर बेहद तीखे व आक्रामक हमले शुरू कर दिए हैं।
सोमवार को केरल विधानसभा में पारित यह प्रस्ताव अपने आप में भारत का अपनी तरह का पहला ऐसा राजनीतिक कदम है। मुख्यमंत्री (और विपक्ष के नेता) वी.डी. सतीसन के नेतृत्व में पेश किए गए इस प्रस्ताव के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान हटाए गए ‘योग्य मतदाताओं’ को दोबारा मतदाता सूची में जोड़ने और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव करने की पुरजोर मांग की गई है। 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में इस प्रस्ताव को 137 मतों के भारी समर्थन से पारित कर दिया गया, जबकि इसके विरोध में केवल 3 मत पड़े, जो राज्य के तीनों बीजेपी विधायकों के थे। हालांकि, इस फैसले ने कांग्रेस को एक बेहद असहज स्थिति में ला खड़ा किया है, क्योंकि जिस चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर आज पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठा रही है, उसी प्रक्रिया और संशोधित मतदाता सूचियों के सहारे उसकी पार्टी ने कुछ महीने पहले ही एलडीएफ (LDF) को हराकर सत्ता हासिल की थी।
इस स्पष्ट विरोधाभास को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस पार्टी पर “धोखाधड़ी की राजनीति” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे दोमुंही नीति अपना रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी याद दिलाया कि खुद कांग्रेस के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण ही कांग्रेस को केरल में जीत हासिल करने में मदद मिली थी क्योंकि इससे सीपीएम के फर्जी और दोहरे वोटों की धांधली पर लगाम लगी थी। इसके अलावा, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने भी कांग्रेस के इस कदम को राजनीतिक अवसरवादिता करार दिया है। बीजेपी का यह तीखा सवाल अब यह है कि यदि एसआईआर प्रक्रिया इतनी ही संदिग्ध थी, तो क्या केरल के मौजूदा विधानसभा चुनाव के नतीजे भी अवैध माने जाएं? इस तरह, राष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक रुख अपनाने वाली कांग्रेस के लिए केरल का यह घटनाक्रम जी का जंजाल बन गया है।
