कभी ममता की तारीफ तो कभी संन्यास का ऐलान! आखिर क्यों बार-बार यू-टर्न ले रहे हैं मदन मित्रा?

कभी राजनीतिक संन्यास लेने की बात तो कभी ममता बनर्जी की शान में कसीदे पढ़ना— पिछले चौबीस घंटों के भीतर कामरहट्टी के विधायक मदन मित्रा ने अपने बयानों से बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है। अपने रंगीन मिजाज और बेबाक बयानों के लिए मशहूर मदन मित्रा एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। राज्य में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कुछ समय तक उन्हें ममता बनर्जी के करीबी घेरे में देखा गया था, लेकिन शुक्रवार को उनके बयानों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी। शुक्रवार दोपहर को जहां उन्होंने ममता को सर्वसर्वा बताया, वहीं महज बारह घंटे के भीतर उनके सुर पूरी तरह बदल गए।
शुक्रवार दोपहर को मीडिया से बातचीत करते हुए मदन मित्रा ने दावा किया था, “चुनाव चिन्ह जिसे भी मिले, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के पर्याय हैं। ममता बनर्जी ही अल्टीमेट तृणमूल हैं।” लेकिन इस बयान के ठीक बारह घंटे बाद, शुक्रवार की रात एक वीडियो संदेश में मदन मित्रा ने बिल्कुल उलट बयान दे दिया। रात के समय उन्होंने कहा, “आपकी नेता, एक दिन मेरी भी नेता थीं। इस बात को बिल्कुल साफ समझ लीजिए। जैसे कभी अटल बिहारी वाजपेयी हुआ करते थे, वह अब पास्ट टेंस (भूतकाल) बन चुके हैं।”
बात यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद मदन मित्रा ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “शुभेंदु अधिकारी ने यह सम्मान खुद हासिल किया है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें कभी फ्लोर टेस्ट देने की जरूरत पड़ेगी। और अगर देना भी पड़े, और आप कहें कि 275 लोग हैं… तो देखना यह आंकड़ा बढ़कर 290 हो जाएगा।” मदन मित्रा ने यहां तक दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी आने वाले अगले बीस वर्षों तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।
सुबह कुछ और और रात को बिल्कुल विपरीत बयान देने के इस मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तृणमूल खेमे की ओर से नेता वैश्वानर चट्टोपाध्याय ने कटाक्ष करते हुए कहा, “जब उन्हें पुलिस का नोटिस मिलता है, तो वह एक तरह की बात करते हैं और जब ईडी का नोटिस मिलता है, तो वह दूसरी तरह की बात करने लगते हैं। इन बातों का अब कोई मतलब नहीं रह गया है।”
वहीं, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा, “मदन मित्रा ने क्या कहा है, इसका कोई महत्व नहीं है। असल बात यह है कि उन्होंने यह बयान किस समय और किस परिस्थिति में दिया है।” मदन मित्रा के इस सनसनीखेज यू-टर्न ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में उनका यह कदम उन्हें किस दिशा में ले जाता है।
