अल्बानिया में सरकार के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा! भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ राजधानी तिराना में उग्र प्रदर्शन

बाल्कन क्षेत्र के खूबसूरत देश अल्बानिया (Albania) में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल अपने चरम पर पहुंच गई है। देश के प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) की सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी (Unemployment) और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के विरोध में राजधानी तिराना (Tirana) की सड़कों पर हजारों की संख्या में छात्र और आम नागरिक उतर आए हैं। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए संसद भवन के सामने अनूठा ‘चेयर प्रोटेस्ट’ (Chair Protest) शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (Water Cannon) और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया, जिससे पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
अल्बानियाई छात्र प्रदर्शनकारियों (Albania Student Protesters) का मुख्य आरोप है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है, जिससे युवाओं का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय नजर आ रहा है। देश में रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने और शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार के कारण युवा वर्ग बुरी तरह हताश है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और उग्र छात्रों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और झड़प हुई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में दंगा रोधी पुलिस बल को तैनात किया गया है, लेकिन इसके बावजूद युवाओं का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इस पूरे आंदोलन के बीच 19 वर्षीय छात्रा जाइके कुर्ती (Xyke Kurti) की आवाज देश भर के युवाओं की आवाज बन गई है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा, “हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। देश में भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ चुका है कि आम इंसान का जीना मुहाल हो गया है। रोजगार के नाम पर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक यह भ्रष्ट सरकार सत्ता से बेदखल नहीं हो जाती और प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे देते।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अल्बानिया में युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण बड़ी संख्या में युवा देश छोड़ने को मजबूर हैं। इसके अलावा महंगाई ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि सरकार यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन देश के भीतर व्याप्त आंतरिक असंतोष और प्रशासनिक विफलता इन दावों की पोल खोल रही है। विपक्षी दलों ने भी इस छात्र आंदोलन को अपना खुला समर्थन दे दिया है, जिससे प्रधानमंत्री एडी रामा की मुश्किलें आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। फिलहाल तिराना में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है।
