धनखड़ का इस्तीफा: स्वास्थ्य बहाना या सियासी संकेत?
नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी हलचलों को तेज कर दिया है। संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उनका इस्तीफा राष्ट्रपति ने तुरंत स्वीकार किया, जबकि गृह मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दी। हालांकि सरकारी बयान में ‘स्वास्थ्य कारण’ का हवाला दिया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता से बढ़ते मतभेद का संकेत माना जा रहा है।
धनखड़ का बिना विदाई भाषण दिए जाना, और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शिष्ट संदेश देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, लेकिन अमित शाह, राजनाथ सिंह या जेपी नड्डा जैसे नेता पूरी तरह मौन रहे। विश्लेषकों के अनुसार, जस्टिस वर्मा पर विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करना और बिना सरकार से सलाह लिए कई निर्णय लेना इस असहमति की वजह बन सकता है।
सूत्रों के अनुसार, धनखड़ की स्वतंत्र कार्यशैली और विपक्ष के प्रति नरम रुख बीजेपी नेतृत्व को लंबे समय से असहज कर रहा था। मानसून सत्र के दौरान जब सत्ता-विपक्ष की टकराहट तेज होनी थी, तब उनका जाना सिर्फ एक संवैधानिक रिक्तता नहीं, बल्कि सरकार के लिए रणनीतिक असंतुलन भी दर्शाता है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा—एक आज्ञाकारी पार्टी चेहरा या सत्ता और विपक्ष के बीच सेतु बनने वाला कोई नया नेतृत्व?
