स्मार्टफोन रखा तो सीधे संस्थान से बाहर होंगे छात्र, दारुल उलूम देवबंद ने जारी किया सख्त फरमान!

विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही छात्रों के लिए कड़े अनुशासन का नोटिस जारी किया है। संस्थान प्रशासन ने परिसर में मल्टीमीडिया और एंड्रॉयड स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध को एक बार फिर दोहराया है। इस आदेश के तहत करीब 1500 नए प्रवेश लेने वाले छात्रों सहित सभी पुराने छात्रों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें सीधे निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है।
कड़ी कार्रवाई और निष्कासन की चेतावनी
छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास के अनुसार, यदि कोई छात्र स्मार्टफोन के साथ पाया जाता है, तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि वह फोन का उपयोग कर रहा था या नहीं। केवल फोन की मौजूदगी ही अनुशासनहीनता मानी जाएगी और छात्र का नाम संस्थान से काट दिया जाएगा। प्रशासन का तर्क है कि इस कड़े कदम का उद्देश्य शैक्षणिक वातावरण को सुरक्षित रखना और छात्रों को अनावश्यक डिजिटल व्याकुलता से बचाना है।
पुराने नियम को किया गया सख्त
संस्थान में एंड्रॉयड फोन पर प्रतिबंध का नियम पिछले कई वर्षों से प्रभावी है, लेकिन इस सत्र में इसे अधिक गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों को संचार के लिए केवल साधारण कीपैड वाले फोन रखने की ही अनुमति दी गई है। इस निर्णय का व्यापक प्रभाव नए सत्र में प्रवेश लेने वाले उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा जो आधुनिक तकनीक के अभ्यस्त हैं, लेकिन अब उन्हें संस्थान के पारंपरिक और सख्त नियमों के दायरे में रहकर अपनी शिक्षा पूरी करनी होगी।
एक झलक में
- दारुल उलूम देवबंद ने परिसर में स्मार्टफोन और मल्टीमीडिया फोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों को सीधे निष्कासन (नाम काटने) की चेतावनी दी गई है।
- करीब 1500 नए छात्रों सहित सभी पुराने विद्यार्थियों के लिए यह आदेश अनिवार्य रूप से लागू होगा।
- शैक्षणिक एकाग्रता बनाए रखने के लिए केवल साधारण कीपैड फोन रखने की अनुमति दी गई है।
