संसद में मोदी सरकार की बड़ी हार, 12 साल में पहली बार गिर गया कोई सरकारी बिल!

संसद में मोदी सरकार की बड़ी हार, 12 साल में पहली बार गिर गया कोई सरकारी बिल!

भारतीय संसद के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और तमाम कोशिशों के बावजूद महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में गिर गया। 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई बिल संसद में मतदान के दौरान पारित होने में विफल रहा। विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की एकजुटता के चलते सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सकी।

विपक्ष की एकजुटता और रणनीतिक घेराबंदी

इस संवैधानिक संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए कम से कम 352 वोटों की आवश्यकता थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार परिसीमन के जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करने और राजनीतिक नक्शा बदलने की साजिश रच रही है। ममता बनर्जी और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने इसे देश को बांटने की कोशिश करार दिया, जिसके बाद विपक्ष ने एकजुट होकर वोटिंग में सरकार को मात दी।

हार का प्रभाव और भविष्य की राह

बिल के विफल होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों को भी वापस लेने की घोषणा की। सरकार ने इस हार को विपक्ष द्वारा महिलाओं के अपमान से जोड़ा है, वहीं विपक्षी खेमे ने इसे प्रधानमंत्री के ‘अहंकार की हार’ बताया है। इस घटनाक्रम से आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि सरकार ने साफ किया है कि वह आरक्षण के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।

एक झलक में

  • मोदी सरकार को 12 साल में पहली बार संसद के भीतर किसी बिल पर हार का सामना करना पड़ा।
  • महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा 131वां संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया।
  • ‘INDIA’ गठबंधन ने परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए एकजुट होकर मतदान किया।
  • बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जबकि बहुमत के लिए 352 वोट जरूरी थे।