राहुल और अभिषेक की बातचीत ने बढ़ाई सियासी हलचल, मोदी सरकार की बिल विफलता के बाद बदला समीकरण

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संशोधनों पर मोदी सरकार की विफलता ने विपक्षी खेमे में नई ऊर्जा भर दी है। पिछले 15 वर्षों में यह पहली बार है जब केंद्र सरकार सदन में कोई महत्वपूर्ण बिल पास कराने में असमर्थ रही। इस बड़ी विधायी जीत के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को फोन कर धन्यवाद दिया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव ने भी क्रमशः डेरेक ओ’ब्रायन और ममता बनर्जी से संपर्क साधा, जो विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सदन में समन्वय और भाजपा का पलटवार
विपक्ष की इस रणनीति ने भाजपा को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है। तृणमूल सांसदों ने सदन में उपस्थित रहकर संशोधनों के खिलाफ मतदान किया, जिससे सरकार आवश्यक बहुमत जुटाने में विफल रही। हालांकि, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने इस ‘फোনাफोंनी’ पर तीखा कटाक्ष किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह “दिल्ली में दोस्ती और बंगाल में कुश्ती” जैसा दोहरा रवैया है। यह बयान राहुल गांधी के उस हालिया प्रचार के संदर्भ में आया है जिसमें उन्होंने बंगाल की धरती से ममता सरकार पर कड़े प्रहार किए थे।
विपक्ष का दावा और भविष्य की रणनीति
अभिषेक बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए सरकार अब “उधार के समय” पर चल रही है और उनका नियंत्रण खोने का भ्रम अब टूट रहा है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के साथ बातचीत में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के खिलाफ बढ़ती लहर का जिक्र किया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को जोड़ना राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है, जिसका पुरजोर विरोध जारी रहेगा। इस समन्वय से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ गठबंधन अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, भले ही राज्यों में समीकरण अलग हों।
एक झलक में
- 15 साल में पहली बार मोदी सरकार लोकसभा में बिल पास कराने में विफल रही।
- राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को फोन कर विपक्षी एकजुटता के लिए आभार जताया।
- भाजपा ने कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों को “दिल्ली में दोस्ती, बंगाल में कुश्ती” करार दिया।
- विपक्षी नेताओं ने इसे एनडीए के कमजोर होते नियंत्रण और राष्ट्रीय राजनीति में बदलाव का संकेत बताया।
