मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में बिहार देश में तीसरे स्थान पर, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

बिहार में सुशासन और कानून-व्यवस्था के लाख दावों के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के आंकड़े राज्य की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। राज्य में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों का आंकड़ा 1.22 लाख के पार पहुंच गया है, जिसमें सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस विभाग के खिलाफ दर्ज की गई हैं। यह रिपोर्ट आम नागरिकों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संकट पैदा करती है।
आंकड़ों के मुताबिक, साल 1993 से अब तक बिहार से कुल 1,22,954 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 1,20,551 मामलों का निपटारा किया जा चुका है और 2,403 मामले अभी भी लंबित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश पहले और दिल्ली दूसरे स्थान पर है, जबकि बिहार इस सूची में तीसरे नंबर पर है। राज्य के आंकड़ों में पुलिस के खिलाफ 35,902 शिकायतें सबसे बड़ा हिस्सा हैं। इसके अलावा शराबबंदी के बावजूद महिलाओं के उत्पीड़न और अपराध की 8,899 और बच्चों के खिलाफ अपराध की 1,891 शिकायतें दर्ज की गईं।
रिपोर्ट का सबसे वीभत्स पहलू हिरासत में हुई मौतें हैं, जिसमें जेल में 4,311 और पुलिस लॉकअप में 238 मौतें दर्ज की गई हैं। जिलावार सूची में राजधानी पटना 12,792 शिकायतों के साथ सबसे ऊपर है, जिसके बाद मुजफ्फरपुर का स्थान आता है। हाल ही में पटना में आयोजित विशेष सुनवाई के दौरान आयोग ने कई मामलों में पीड़ितों को 1.50 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। लगातार बढ़ते ये आंकड़े सरकार और प्रशासन के सामने एक कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।
