आम आदमी पार्टी में बड़ी बगावत के बीच बलवीर सिंह सीचेवाल का खुलासा, ‘चाय’ के न्योते से लेकर पाला बदलने तक की पूरी कहानी

आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के अचानक पाला बदलने से पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बड़ी बगावत के बाद पंजाब से पार्टी के इकलौते राज्यसभा सदस्य बचे पद्मश्री बलवीर सिंह सीचेवाल ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सीचेवाल ने बताया कि उन्हें भी पार्टी छोड़ने और एक स्वतंत्र समूह में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया। इस घटनाक्रम ने राज्य में पार्टी की भविष्य की रणनीति और स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दलबदल के पीछे की रणनीति
सीचेवाल के अनुसार, उन्हें पूर्व सहयोगी विक्रम साहनी का फोन आया था, जिन्होंने उन्हें एक नए स्वतंत्र समूह का हिस्सा बनने का न्योता दिया। साहनी ने दावा किया था कि कई सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिनमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल भी शामिल थे। सीचेवाल ने यह भी बताया कि संसद सत्र के दौरान राघव चड्ढा ने उन्हें पहली बार ‘चाय’ पर चर्चा के लिए बुलाया था, जो उनके अनुसार सामान्य व्यवहार से हटकर था। हालांकि, उन्होंने किसी भी प्रकार की गुप्त चर्चा में शामिल होने से इनकार कर दिया।
संगठन पर प्रभाव और प्रशासनिक फेरबदल
पंजाब में राघव चड्ढा और संदीप पाठक की भूमिकाओं पर सीचेवाल ने हैरानी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले दो-तीन वर्षों से राज्य के प्रशासनिक और संगठनात्मक ढांचे की पूरी कमान इन्हीं नेताओं के हाथ में थी। चंडीगढ़ स्थित मकान संख्या 50, जो राघव चड्ढा का आवास था, राज्य की सत्ता का अघोषित केंद्र बना हुआ था। अब इतने कद्दावर नेताओं के जाने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक तंत्र के बीच भरोसे का संकट पैदा होने की संभावना है।
एक झलक में
- पंजाब से ‘आप’ के 7 में से 6 सांसदों ने पाला बदला, बलवीर सिंह सीचेवाल अब अकेले सांसद बचे हैं।
- सीचेवाल ने दावा किया कि उन्हें स्वतंत्र समूह में शामिल होने के लिए विक्रम साहनी का फोन आया था।
- राघव चड्ढा और संदीप पाठक पर पंजाब के प्रशासनिक कार्यों में अत्यधिक दखल देने का आरोप लगाया।
- दलबदल करने वाले सांसदों में अशोक कुमार मित्तल और हरभजन सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
