महिला आरक्षण बिल पर आज ऐतिहासिक वोटिंग, क्या बदली देश की तस्वीर?
)
संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण पर सियासी घमासान
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का शुक्रवार को दूसरा दिन है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) में संशोधन, ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और ‘संघ राज्य विधि संशोधन विधेयक’ पर गहन चर्चा जारी है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य लोकसभा सदस्यों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करना है। प्रस्ताव के तहत, कुल सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाया जा सकता है।
अधिसूचना और विपक्ष का विरोध
केंद्र सरकार द्वारा 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी करने की अधिसूचना जारी करने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। जहाँ सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसे ‘विचित्र’ करार दिया है। विपक्ष का मुख्य तर्क है कि जब इन विधेयकों में संशोधन पर चर्चा चल रही है, तो कानून को लागू करने की जल्दबाजी क्यों की गई। इसके अतिरिक्त, असदुद्दीन ओवैसी और वामपंथी दलों ने परिसीमन प्रक्रिया को राज्यों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे केंद्र के वर्चस्व को बढ़ाने वाला कदम बताया है।
परिसीमन और भविष्य की राह
सरकार का स्पष्ट मत है कि परिसीमन का कार्य जनगणना के आधार पर होगा और मौजूदा अनुपात प्रभावित नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। हालाँकि, डीएमके द्वारा परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाए जाने और टीएमसी द्वारा उठाए गए सवालों ने सदन में गतिरोध पैदा किया है। इन विधेयकों पर शाम 4 बजे मतदान होना है, जो देश की संसदीय संरचना और महिला प्रतिनिधित्व के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक नजर में
- लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य।
- कुल सीटों का 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित, जो 15 सालों के लिए होगा प्रभावी।
- विपक्ष द्वारा परिसीमन के समय और प्रक्रिया को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए गए।
- महिला आरक्षण अधिनियम 2023 की अधिसूचना जारी, लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन परिसीमन के बाद ही संभव।
