क्या रवि किशन सच में छूते हैं अपनी पत्नी के पैर!

क्या रवि किशन सच में छूते हैं अपनी पत्नी के पैर!

लोकसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के बीच कुछ यादगार और हल्के-फुल्के क्षण

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर गंभीर चर्चा के दौरान सदन में कुछ अनौपचारिक और रोचक दृश्य देखने को मिले। चर्चा के दौरान जब गोरखपुर के सांसद रवि किशन अपनी बात रख रहे थे, तब स्पीकर की कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल ने उनसे उनकी निजी जीवन शैली से जुड़ा सवाल किया। पाल ने भोजपुरी में पूछा कि क्या वे अपनी पत्नी के पैर छूते हैं, जिसके जवाब में रवि किशन ने भावुक और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

संघर्ष और सम्मान की अनूठी बानगी

रवि किशन ने स्वीकार किया कि वे अपनी पत्नी के पैर छूते हैं, क्योंकि उनके संघर्ष के दिनों में उन्होंने ही उन्हें संबल दिया था। उन्होंने सदन के माध्यम से विपक्ष को भी प्रेरणा देते हुए कहा कि जो अपने जीवनसाथी को सम्मान देता है, वही जीवन में सफल होता है। उन्होंने हंसी-मजाक के लहजे में यह भी जोड़ा कि उनकी पत्नी उन्हें पैर छूने से मना करती हैं, परंतु वे उनके सो जाने के बाद छिपकर यह सम्मान देते हैं। इस वाकये ने सदन के माहौल को काफी खुशनुमा बना दिया।

सदन में हंसी-ठिठोली का दौर

कानून से संबंधित इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान मंत्रियों का मजाकिया अंदाज भी चर्चा का विषय रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा सदन में पत्नी को समर्पित कविता पढ़ने के बाद उन्हें घर पर अपनी पत्नी से काफी डांट खानी पड़ी। इस पर सपा सांसद आनंद भदौरिया ने भी कविता पाठ की इच्छा जताई। इन छोटे क्षणों ने महिला आरक्षण जैसे गंभीर और ऐतिहासिक नीतिगत विषयों के बीच मानवीय संवेदनाओं और हास्य को भी स्थान दिया।

एक नजर में

  • लोकसभा में ‘संविधान संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान रोचक और हल्के-फुल्के पल देखने को मिले।
  • सांसद रवि किशन ने पत्नी के प्रति सम्मान और उनके संघर्षों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सदन में एक भावनात्मक संदेश दिया।
  • केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य सांसदों ने कविता पाठ और निजी जीवन के अनुभवों को साझा कर सदन में सकारात्मक माहौल बनाया।
  • गंभीर विधायी चर्चा के बीच घटी इन घटनाओं ने सदन की कार्यवाही को सामान्य चर्चाओं से इतर एक मानवीय और अनौपचारिक रंग दिया।

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