भारत-चीन समीपता से हिला पाकिस्तान
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच हाल ही में बढ़ी कूटनीतिक नजदीकियों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चार दिवसीय चीन यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा भर दी है। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक से पहले हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। जयशंकर ने कैलाश मानसरोवर यात्रा में चीन के सहयोग की सराहना भी की।
यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2020 की गलवान झड़प के बाद यह भारत के विदेश मंत्री की पहली चीन यात्रा है। यह इशारा करता है कि दोनों पक्ष तनावपूर्ण अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। सीमा पर स्थिरता, व्यापार सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन जैसे मुद्दों पर चर्चा होने से संबंधों में सकारात्मक मोड़ की संभावना बढ़ गई है। भारत-चीन संबंधों में यह परिवर्तन पाकिस्तान के लिए रणनीतिक झटका हो सकता है।
पाकिस्तान, जो वर्षों से चीन को अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता आया है, अब खुद को बदलती वैश्विक समीकरणों के बीच असहज स्थिति में पा सकता है। यदि चीन भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता देता है, तो इस्लामाबाद की कूटनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है। भारत की यह चाल न केवल चीन के साथ तनाव को कम करती है, बल्कि पाकिस्तान की रणनीति को पुनर्विचार के लिए मजबूर भी करती है।
