तीन शताब्दियों पुरानी विरासत से छीन गया ‘धरना स्थल’ का टैग, जानिए क्या है नया आदेश?

तीन शताब्दियों पुरानी विरासत से छीन गया ‘धरना स्थल’ का टैग, जानिए क्या है नया आदेश?

दशकों से दिल्ली का जंतर-मंतर रोड देश भर से आने वाले प्रदर्शनकारियों, जन-आंदोलनों और विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले नागरिकों का मुख्य केंद्र रहा है। यह सड़क केवल एक भौगोलिक पता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा प्रतीक बन चुकी थी। 18वीं सदी में निर्मित ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला के नाम पर बनी इस सड़क का इतिहास न केवल स्थापत्य कला से जुड़ा है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का भी एक अटूट हिस्सा रहा है।

मध्य दिल्ली के इस प्रतिष्ठित इलाके में ब्रिटिश काल के कई ऐतिहासिक बंगले स्थित हैं, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस तीन सौ साल पुरानी वेधशाला का संरक्षण करता है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए स्थायी आदेश जारी किया, जिसके तहत जंतर-मंतर रोड को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके स्थान पर भविष्य के बड़े विरोध प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को तीन नए अधिकृत स्थलों के रूप में घोषित किया गया है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की बात करें तो 1993 में इंडिया गेट के बोट क्लब पर प्रदर्शनों पर रोक लगाए जाने के बाद जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के प्राथमिक स्थल के रूप में उभरा था। इस स्थान का नाम जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 1724 में निर्मित खगोलीय वेधशाला के नाम पर पड़ा था। तीन शताब्दियों से अधिक पुरानी यह इमारत भारतीय वास्तुकला और वैज्ञानिक प्रतिभा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके विशाल परिसर में सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र, राम यंत्र और मिश्र यंत्र जैसे जटिल खगोलीय उपकरण स्थापित हैं, जो समय और खगोलीय घटनाओं की सटीक गणना के लिए ठोस चिनाई संरचनाओं से बनाए गए थे।

जंतर-मंतर रोड का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं रहा है। इस सड़क पर स्थित ‘7, जंतर-मंतर रोड’ का बंगला एक विशेष पहचान रखता है। ब्रिटिश काल का यह भव्य दो मंजिला बंगला कभी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का राष्ट्रीय मुख्यालय रह चुका है और वर्तमान में यहां एक ट्रस्ट द्वारा संचालित पुस्तकालय मौजूद है। दशकों तक अनगिनत राजनीतिक बदलावों, रैलियों, भूख हड़तालों और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों की मूक गवाह रही यह सड़क अब पुलिस के नए नियमों के बाद आंदोलनों के शोर से दूर केवल एक ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में अपनी नई पहचान की ओर बढ़ रही है।

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