कांप उठा भूस्वर्ग! हिंदूकुश क्षेत्र में आए 5.5 तीव्रता के जोरदार भूकंप से दहला भारत और पाकिस्तान

बीते रविवार की देर रात एक बार फिर शक्तिशाली भूकंप के झटकों ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। अफगानिस्तान के हिंदूकुश पर्वतमाला क्षेत्र में आए इस भीषण भूकंप का असर सीधे तौर पर भारत के जम्मू-कश्मीर और कई अन्य उत्तर भारतीय राज्यों में देखने को मिला। नेशनल सेंटर फॉर सिसमोलॉजी (NCS) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप भारतीय समयानुसार रविवार, २५ अक्टूबर की रात ११ बजकर १४ मिनट और २२ सेकंड पर आया। रिक्टर स्केल पर इस भूगर्भीय हलचल की तीव्रता ५.५ मापी गई। इस झटके के कारण न केवल अफगानिस्तान, बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली, पंजाब, पड़ोसी देश पाकिस्तान और ताजिकिस्तान के कई हिस्सों में भी धरती डोल उठी। मध्यरात्रि में अचानक आए इस झटके से लोगों की नींद उड़ गई और वे दहशत के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप विज्ञान केंद्र से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र था। हालांकि, गनीमत यह रही कि जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य प्रभावित इलाकों से फिलहाल किसी भी प्रकार के जानमाल के भारी नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयां पूरी तरह से मुस्तैद हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान और उसके आसपास के भू-भाग में शक्तिशाली भूकंप आने की आवृत्ति में काफी तेजी आई है, जिससे उप-महाद्वीप के वैज्ञानिक खासे चिंतित हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले ३१ अगस्त २०२५ को पूर्वी अफगानिस्तान में एक अत्यंत विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। उस समय रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता ६.० दर्ज की गई थी और उस प्राकृतिक आपदा में लगभग २,२०० लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा, पिछले साल नवंबर के महीने में भी ६.३ तीव्रता का एक और शक्तिशाली झटका महसूस किया गया था, जिसमें दर्जनों मकान ढह गए थे और मलबे में दबने से कम बार मौतों की पुष्टि हुई थी। इस तरह की लगातार दुर्घटनाएं इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को बेहद संवेदनशील और खतरनाक बनाती हैं।
विशेषज्ञों और भूवैज्ञानिकों का मानना है कि हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला दुनिया के सबसे सक्रिय और संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों (Seismic Zones) में गिनी जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के बीच लगातार हो रहा टकराव है। भारतीय प्लेट निरंतर उत्तर दिशा की ओर खिसक रही है और यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिसके कारण भूमि के भीतर भारी दबाव उत्पन्न होता है। यह भूगर्भीय ऊर्जा जब चट्टानों के टूटने से अचानक बाहर निकलती है, तो शक्तिशाली भूकंप के रूप में धरती को कंपा देती है। इस क्षेत्र में उथले और गहरे दोनों तरह के भूकंप आते हैं, जो बहुत दूर तक भारी कंपन पैदा करने की क्षमता रखते हैं।
