संविधान संशोधन बिल गिरने पर मोदी सरकार को प्रहार, प्रियंका गांधी ने बताया लोकतंत्र की बड़ी जीत

नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी संविधान संशोधन बिल के पारित न हो पाने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने तीखा हमला बोला है। महिला आरक्षण के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े 131वें संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने को उन्होंने लोकतंत्र की जीत और एनडीए के लिए ‘काला दिन’ करार दिया। शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के पीछे महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सत्ता में बने रहने की एक गहरी राजनीतिक साजिश थी।
विपक्ष का प्रहार और सरकार की विफलता
विधेयक पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सरकार विफल रही, जिसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने इस बिल को इस तरह से तैयार किया था कि यदि यह पास हो जाता तो वे इसका श्रेय लेते, और यदि विफल होता तो विपक्ष को महिला विरोधी बताते। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि देश की महिलाएं इतनी नासमझ नहीं हैं कि वे केवल पीआर और मीडिया प्रचार के जाल में फंस जाएं।
आरक्षण को लेकर उठते सवाल
विपक्ष का मुख्य विरोध आरक्षण को परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़ने पर था। कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना चाहती है, तो उसे 2023 के सर्वसम्मत बिल को लागू करना चाहिए न कि इसे पेचीदा शर्तों के साथ जोड़ना चाहिए। जानकारों का मानना है कि इस विफलता का मुख्य कारण सरकार द्वारा विपक्ष को विश्वास में न ले पाना और बिल के ढांचे में मौजूद तकनीकी खामियां रहीं, जिससे सदन में राजनीतिक संतुलन बिगड़ने का डर था।
एक झलक में
- मोदी सरकार के 12 साल के इतिहास में पहली बार कोई संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिरा।
- प्रियंका गांधी ने इस घटना को महिलाओं के साथ छलावा और एनडीए की राजनीतिक साजिश बताया।
- लोकसभा में बहुमत के अभाव में बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े।
- विपक्ष ने आरक्षण को परिसीमन से अलग कर तुरंत प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की।
