महिला आरक्षण पर छिड़ा सियासी घमासान, प्रियंका गांधी ने सरकार को दी खुली चुनौती!

संसद के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित न हो पाने के बाद महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए पुराने महिला आरक्षण बिल को तत्काल प्रभाव से वापस लाने की मांग की है। प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार सोमवार को पुराना विधेयक सदन में पेश करती है, तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर इसका समर्थन करेगा।
विपक्ष की रणनीति और साझा मोर्चा
इंडिया गठबंधन ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के नेता जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर पुराने बिल को लागू करने की मांग करेंगे। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में देश का राजनीतिक नक्शा बदलने और सीटों के परिसीमन के जरिए अपने हितों को साधने का प्रयास कर रही थी। इस रणनीति के तहत अब देश भर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जनता के बीच सरकार की कथित ‘विफलताओं’ को ले जाने की योजना है।
बिल गिरने के कारण और प्रभाव
लोकसभा में शुक्रवार को हुई वोटिंग के दौरान सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही। सदन में मौजूद 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया, जबकि बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस विधेयक के माध्यम से सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था, जिसे विपक्ष ने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। बिल के गिरने से अब महिला आरक्षण का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है, जिससे आने वाले चुनावों में महिला सुरक्षा और प्रतिनिधित्व एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की संभावना है।
एक झलक में
- लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संशोधन विधेयक गिरा।
- प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती देते हुए सोमवार को पुराना बिल लाने और विपक्ष का समर्थन लेने की बात कही।
- इंडिया गठबंधन पुराने विधेयक की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखेगा और देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।
- विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने के लिए नया बिल लाई थी।
