दफ्तरों में ‘पॉश’ शिकायतों की अनदेखी, क्या असुरक्षित हो रहा है आपका कार्यस्थल!

टीसीएस नासिक मामला: कार्यस्थलों पर ‘पॉश’ कानूनों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बीपीओ कैंपस में महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों ने कॉरपोरेट जगत की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी पर ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम’ (POSH Act) के दिशा-निर्देशों का पालन न करने का आरोप है। इस मामले की जांच के लिए अब एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, वहीं कर्मचारी संगठन ‘नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट’ ने श्रम मंत्रालय से राज्य की अन्य आईटी कंपनियों के ऑडिट की मांग की है।
कानूनी अनुपालन और कार्यस्थल की संवेदनशीलता
वर्ष 2013 से लागू पॉश कानून के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना अनिवार्य है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां इसे एक अतिरिक्त ‘खर्च’ या औपचारिकता मानती हैं। अक्सर शिकायत मिलने के बाद ही आनन-फानन में समितियों का गठन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, एचआर विभागों में पूर्वाग्रह और महिलाओं को करियर के नुकसान का डर दिखाकर शिकायत दर्ज न करने के लिए दबाव डालना कार्यस्थल की सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल पीड़ितों का मनोबल गिराती है, बल्कि कॉरपोरेट संस्कृति की संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।
प्रभावी निवारण में बाधा और भविष्य की चुनौतियां
कार्यस्थलों पर सुरक्षा को लेकर आई चुनौतियों का सबसे बड़ा कारण जागरूकता का अभाव और निवारण तंत्र में ढिलाई है। चाहे संगठित क्षेत्र हो या असंगठित, प्रभावकारी निगरानी की कमी ने महिलाओं को असुरक्षित बना दिया है। जानकार मानते हैं कि केवल शिकायतें दर्ज करना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमित ट्रेनिंग, पुरुष कर्मचारियों को कार्यस्थल की मर्यादा के प्रति जागरूक करना और जिला स्तरीय समितियों की सक्रियता सुनिश्चित करना समय की मांग है। यदि कंपनियों ने जल्द ही अपनी नीतियों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता नहीं अपनाई, तो न केवल उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा प्रभावित होगी, बल्कि इससे संगठनात्मक माहौल भी पूरी तरह दूषित हो सकता है।
एक नजर में
- नासिक टीसीएस कैंपस में यौन दुर्व्यवहार के आरोपों की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा पड़ताल की जा रही है।
- आरोप है कि कंपनी ने पॉश (POSH) कानून के तहत अनिवार्य दिशा-निर्देशों और शिकायत निवारण प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया।
- भारत की बड़ी कंपनियों में वित्त वर्ष 2025 के दौरान यौन उत्पीड़न की शिकायतों में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
- विशेषज्ञ नियमित ट्रेनिंग, निष्पक्ष आंतरिक समितियों और कार्यस्थल पर जवाबदेही तय करने को सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानते हैं।
