राहुल गांधी के लिए मुसीबतें बढ़ीं, दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर के आदेश!

राहुल गांधी के लिए मुसीबतें बढ़ीं, दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर के आदेश!

इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश: राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता मामले में FIR दर्ज करने के निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े आरोपों की जांच के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह निर्देश बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया है कि या तो वह स्वयं इस मामले की जांच करे या इसे किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपे। इससे पूर्व, रायबरेली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने नागरिकता से संबंधित अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया था।

विवाद और कानूनी प्रक्रिया
यह मामला काफी समय से कानूनी दायरे में है, जिसमें याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), फॉरेनर्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले 17 दिसंबर, 2025 को हाई कोर्ट ने इस केस को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। अब हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद रायबरेली के कोतवाली पुलिस स्टेशन को प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। याचिकाकर्ता ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित का मामला बताते हुए जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।

इस घटनाक्रम के कारण राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति और संवैधानिक योग्यता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। जांच के दौरान यदि आरोप पुष्ट होते हैं या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। फिलहाल, याचिकाकर्ता ने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर गृह मंत्रालय से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। आने वाले समय में पुलिस और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय करेगी।

एक नजर में

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।
  • कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्वयं जांच करने या मामले को केंद्रीय एजेंसी के सुपुर्द करने का निर्देश दिया है।
  • याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया है।
  • यह मामला भारतीय न्याय संहिता, फॉरेनर्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित है।

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