तेलंगाना जाति सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े: एक ही बिरादरी के पास 13 फीसदी से ज्यादा जमीन!

तेलंगाना जाति सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े: एक ही बिरादरी के पास 13 फीसदी से ज्यादा जमीन!

तेलंगाना जाति सर्वे: संसाधनों के असमान वितरण और सामाजिक चुनौतियों की तस्वीर

तेलंगाना सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए सामाजिक, आर्थिक और जाति सर्वे-2024 ने राज्य में संसाधनों के वितरण और सामाजिक असमानता का विस्तृत ब्यौरा पेश किया है। आंकड़ों के अनुसार, भूमि स्वामित्व और आर्थिक संपन्नता में गहरी खाई मौजूद है। मात्र 4.8 प्रतिशत आबादी वाला रेड्डी समुदाय राज्य की 13.5 प्रतिशत भूमि का मालिक है, जबकि अधिकांश अन्य जातियां औसत सिंचित भूमि से काफी पीछे हैं। यह असमानता ऐतिहासिक भूमि संचय और वर्तमान आर्थिक अवसरों की भिन्नता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

आर्थिक और शैक्षणिक अंतराल
सर्वे में कार स्वामित्व का डेटा समुदायों की आर्थिक स्थिति का एक प्रमुख पैमाना बनकर उभरा है। सामान्य जाति के परिवारों में कार रखने की दर ओबीसी के मुकाबले तीन गुना और एससी-एसटी के मुकाबले पांच गुना अधिक है। विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय में 16.4 प्रतिशत परिवारों के पास कार है, जो राज्य के औसत से कहीं अधिक है। साथ ही, शैक्षिक स्तर पर भी भारी अंतर देखा गया है, जहाँ उच्च जातियों और कुछ विशिष्ट समूहों की महिलाएं शिक्षा में आगे हैं, वहीं कई एसटी और एससी समुदायों में आज भी माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सामाजिक चुनौतियां और नीति निर्माण
रिपोर्ट में बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्या भी उजागर हुई है, जो राज्य के विकास के दावों के बीच एक बड़ी चिंता का विषय है। राज्य में 2.16 लाख लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से कम आयु में हुआ है, जिसमें इयेंगर/अय्यर और जैन समुदायों में बाल विवाह की दर राज्य औसत से काफी अधिक दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्वे समाज की वास्तविक स्थिति का एक ‘हेल्थ चेक-अप’ है, जो यह साबित करता है कि भूमि, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के सीमित अवसर वंचित वर्गों के पिछड़ेपन के मुख्य कारण बने हुए हैं। आने वाले समय में राज्य सरकार इन आंकड़ों का उपयोग लक्षित नीति निर्माण के लिए करेगी।

एक नजर में

  • रेड्डी और यादव समुदाय भूमि स्वामित्व में अन्य जातियों की तुलना में काफी आगे हैं।
  • सामान्य जाति के परिवारों में कार स्वामित्व की दर एससी-एसटी की तुलना में पांच गुना अधिक है।
  • इयेंगर/अय्यर और जैन समुदायों में बाल विवाह की दर राज्य औसत से अधिक पाई गई है।
  • सर्वे 3.55 करोड़ लोगों के डेटा पर आधारित है, जो भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार बनेगा।

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