SIA की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल कर रहा था खतरनाक TATP विस्फोटक का इस्तेमाल!

एसआईए ने ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ का किया पर्दाफाश, 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
सुनियोजित आतंकी साजिश और पोस्टर विवाद
स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने एक महत्वपूर्ण आतंकी साजिश के मामले में 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला पिछले साल अक्टूबर में नौगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जब इलाके में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के नाम से भड़काऊ और धमकी भरे पोस्टर लगाए गए थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह महज एक पोस्टर अभियान नहीं था, बल्कि प्रतिबंधित संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (एजीयूएच) को पुनर्जीवित करने की एक गहरी और सुनियोजित साजिश थी। आरोपी जानबूझकर जेईएम के नाम का उपयोग कर रहे थे ताकि जनता में दहशत फैलाई जा सके और अपनी गतिविधियों को गोपनीय रखा जा सके।
पेशेवरों की भागीदारी और विस्फोटक सामग्री
इस मॉड्यूल की सबसे चिंताजनक बात इसमें पढ़े-लिखे और मेडिकल पेशेवरों (डॉक्टर्स) की संलिप्तता है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपने ज्ञान और संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथ फैलाया और विस्फोटक सामग्री जुटाना शुरू कर दिया था। ये लोग अत्यधिक संवेदनशील और अस्थिर विस्फोटक ‘टीएटीपी’ (TATP) विकसित करने की तैयारी कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यदि समय रहते इस नेटवर्क का भंडाफोड़ नहीं किया गया होता, तो ये घातक हमले सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते थे। डिजिटल फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एसआईए ने इस आतंकी नेटवर्क के ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
एक नजर में
- एसआईए कश्मीर ने 10 सदस्यीय ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ के खिलाफ चार्जशीट दायर की।
- आरोपियों का मुख्य उद्देश्य ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (एजीयूएच) को फिर से सक्रिय करना था।
- मेडिकल पेशेवरों ने विस्फोटक बनाने और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थानों का गलत इस्तेमाल किया।
- एजेंसी ने सबूतों के माध्यम से मॉड्यूल को समय रहते बेअसर कर एक बड़ी साजिश को नाकाम किया है।
