राज्यसभा में राघव चड्ढा का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला!

राज्यसभा में राघव चड्ढा का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला!

आप में आंतरिक कलह: राज्यसभा में राघव चड्ढा का तीखा तंज

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रहे गहरे मतभेद अब संसद के गलियारों में खुलकर सामने आ गए हैं। हाल ही में राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सदन के भीतर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला। उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए चड्ढा ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता और नवनियुक्त उपनेता सदन में अनुपस्थित हैं, जबकि उन्हें ही ‘हटाया गया उपनेता’ होने के बावजूद सदन में उपस्थित रहने का मौका मिला है।

सत्ता का टकराव और रणनीतिक कटाक्ष

इस विवाद की जड़ 2 अप्रैल को पार्टी द्वारा लिए गए उस फैसले में है, जिसमें चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया था। इस निर्णय के बाद से ही चड्ढा ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए रॉबर्ट ग्रीन की प्रसिद्ध पुस्तक ‘द 48 लॉज ऑफ पावर’ का उल्लेख किया, जो ‘अपने बॉस से अधिक चमकने की कोशिश न करने’ की सीख देती है। यह कटाक्ष पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके बिगड़ते रिश्तों की पुष्टि करता है।

राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

पार्टी के इस कदम ने AAP के संगठनात्मक अनुशासन और चड्ढा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी की इस कार्रवाई से पंजाब के सांसदों और दिल्ली नेतृत्व के बीच का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यदि पार्टी के भीतर यह असंतोष बढ़ता है, तो आगामी संसदीय सत्रों में ‘आप’ की एकजुटता और सदन में पार्टी की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।

एक नजर में

  • AAP ने राज्यसभा के उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त किया है।
  • चड्ढा ने राज्यसभा में सार्वजनिक रूप से कटाक्ष करते हुए पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी जताई।
  • पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद सोशल मीडिया पर ‘द 48 लॉज ऑफ पावर’ के जिक्र के बाद और गहरे हो गए हैं।
  • इस अंदरूनी खींचतान का असर सदन में पार्टी की रणनीति और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

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